CAFE-III Norms: ऑटो इंडस्ट्री के लिए निवेश का नया रास्ता और क्लीन टेक्नोलॉजी पर जोर

CAFE-III norms provide a clear roadmap for automakers to invest in cleaner technologies like EVs, hybrids, and flex-fuel vehicles by 2032.

Lakhan Sharma30 September 20262 min read4 viewsnews
CAFE-III Norms: ऑटो इंडस्ट्री के लिए निवेश का नया रास्ता और क्लीन टेक्नोलॉजी पर जोर

भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए Corporate Average Fuel Economy (CAFE-III) मानदंडों ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में भविष्य की निवेश योजनाओं को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर पेश कर दी है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ये नए नियम पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों और कंपनियों की तकनीकी क्षमता के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाएंगे।

अगले 5 वर्षों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप

Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के अध्यक्ष शेनू अग्रवाल के अनुसार, यह पांच साल का फ्रेमवर्क ऑटोमेकर्स को भविष्य की योजनाएं बनाने और नवाचार (innovation) को गति देने में मदद करेगा। CAFE-III नियमों के तहत अगले पांच वर्षों के लिए आक्रामक वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिससे बाजार आधारित अनुपालन तंत्र (compliance mechanism) को मजबूती मिलेगी।

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इस नए ढांचे के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • निवेश में स्पष्टता: कंपनियों को अब पता होगा कि उन्हें किन तकनीकों में पैसा लगाना है।
  • ईंधन की बचत: नए यात्री वाहनों से होने वाली कुल ईंधन खपत में कमी आएगी।
  • तकनीकी विकल्प: निर्माताओं को अलग-अलग तकनीकी रास्तों को चुनने की आजादी मिलेगी।

पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा का संतुलन

महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनेस प्रेसिडेंट वेलुसामी आर ने इस ढांचे का स्वागत करते हुए कहा कि यह नियम पर्यावरण की जरूरतों और उद्योग की वास्तविकताओं के बीच एक व्यावहारिक संतुलन बनाते हैं। यह न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों की सराहना की है, जिनमें शामिल हैं:

  • टेक्नोलॉजी क्रेडिट: नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन।
  • सुपर क्रेडिट्स: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए विशेष लाभ।
  • क्लीनर-फ्यूल बेनिफिट्स: स्वच्छ ईंधन का उपयोग करने वाली कंपनियों को राहत।

2032 तक ईंधन दक्षता में सुधार का लक्ष्य

ये नए CAFE मानदंड 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे। इनका मुख्य उद्देश्य 2032 तक यात्री वाहनों की ईंधन दक्षता (fuel efficiency) में 16.7 प्रतिशत का सुधार करना है। यह फ्रेमवर्क केवल पारंपरिक ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निम्नलिखित विकल्पों को भी मान्यता देता है:

  • इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल
  • बायोफ्यूल्स (Biofuels)
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
  • हाइब्रिड वाहन
  • Flex-Fuel Vehicles

इथेनॉल और बायोफ्यूल उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

All India Distillers’ Association के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि यह ढांचा भारत के इथेनॉल उद्योग और स्वच्छ गतिशीलता (clean mobility) के बीच के संबंध को और मजबूत करेगा। इथेनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को 22.3 प्रतिशत कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर और 1.1x सुपर-क्रेडिट के माध्यम से विशेष पहचान दी गई है।

"अब ध्यान फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम बनाने पर होना चाहिए, जिसमें वाहनों की उपलब्धता, ईंधन बुनियादी ढांचा और उपभोक्ता जागरूकता शामिल है," सिंह ने आगे कहा। यह कदम भारत की इथेनॉल क्षमता को स्वच्छ मोबिलिटी अपनाने में बदलने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

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