चीन में इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ हुईं बहुत पॉपुलर मिली धांसू बिक्री और मार्केट में बढ़ा दबदबा

Lakhan Sharma14 September 20263 min read6 viewsEV News
चीन में इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ हुईं बहुत पॉपुलर मिली धांसू बिक्री और मार्केट में बढ़ा दबदबा

चीन के ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने एक नया ही रिकॉर्ड बना दिया है और वहाँ इनकी बिक्री आसमान छू रही है। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में चीन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का अडॉप्टेशन बढ़कर 65.2 फीसदी तक पहुँच गया है। उस महीने चीन की मुख्य भूमि पर कुल 15.4 लाख वाहन बिके जिनमें से अकेले 10.05 लाख गाड़ियाँ नई एनर्जी वाली यानी इलेक्ट्रिक थीं। अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन बढ़कर 16,43,000 यूनिट हो गया जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 15,64,000 यूनिट का था। इस शानदार तेजी की मुख्य वजह लगातार महंगे होते पेट्रोल और डीजल के दाम हैं जो ईरान में चल रहे संघर्ष की वजह से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा बाजार में लगातार नई इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ लॉन्च हो रही हैं जिससे ग्राहकों के पास ढेरों विकल्प मौजूद हैं। चीन दुनिया भर में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण का गढ़ बन चुका है और साल 2025 में वैश्विक स्तर पर जितनी ईवी बनीं उनमें से करीब 75 फीसदी अकेले चीन में तैयार हुई थीं। उस साल चीन में 13 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बिकी थीं जिससे ग्लोबल मार्केट में उसका दबदबा और ज्यादा मजबूत हो गया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और एनर्जी सप्लाई का संकट

दूसरी तरफ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री तनाव अभी भी पूरी तरह थमा नहीं है और हालात काफी पेचीदा बने हुए हैं। सैन्य हमलों के जवाब में 11 सितंबर 2026 को ईरान ने इस क्षेत्र के शिपिंग रूट को निशाना बनाया था। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि चीन ने इस रास्ते से जुड़े मुद्दों को सुलझा लिया है लेकिन जमीनी हकीकत काफी उलझन भरी है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच अप्रैल 2026 में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से साफ कहा था कि जहाजों के आने-जाने का रास्ता सुरक्षित रखा जाए क्योंकि अमेरिका की तरफ से नाकेबंदी की जा रही थी। अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद चीन के कुछ ऑयल टैंकर जैसे रिच स्टारी ने इस रास्ते से सफलतापूर्वक सफर किया है लेकिन अमेरिकी युद्धपोतों की चेतावनी के बाद कई दूसरे जहाजों को अपना रास्ता बदलकर दूसरी तरफ जाना पड़ा है।

भारत में ईवी सेक्टर का हाल और सरकारी योजनाएँ

अगर भारत की बात करें तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने के मामले में भारत अभी चीन से काफी पीछे चल रहा है। हालांकि भारतीय सरकार इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिश कर रही है जिसके लिए पीएम ई-ड्राइव स्कीम चलाई जा रही है। यह योजना 1 अक्टूबर 2024 से लेकर 31 मार्च 2028 तक लागू है और इसके लिए सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये का बजट रखा है। भारत में इलेक्ट्रिक कारों पर सीधे तौर पर कोई नगद सब्सिडी तो नहीं मिलती है लेकिन इन्हें बहुत कम यानी सिर्फ 5 फीसदी जीएसटी के दायरे में रखा गया है जबकि सामान्य पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर 18 से 40 फीसदी तक टैक्स लगता है। इसके अलावा 1 फरवरी 2026 को आए केंद्रीय बजट में केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया था। साथ ही ऑटो कंपोनेंट के लिए पीएलआई स्कीम का दायरा बढ़ाकर उसमें 5,940 करोड़ रुपये और जोड़े गए हैं। हालांकि 28 अगस्त 2026 की रिपोर्टों से यह संकेत मिले हैं कि इलेक्ट्रिक सब्सिडी में होने वाले संभावित बदलावों की वजह से आने वाले समय में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइकों के दाम बढ़ सकते हैं जिसका सीधा असर आम आदमी और मिडिल क्लास की जेब पर पड़ेगा।


Specification / Feature (English Index)Details (विवरण)
China EV Penetration (August 2026)65.2%
Total NEVs Sold in China (August 2026)1.005 million (out of 1.54 million total vehicles)
Electric Car Registrations (August 2026)1,643,000 units
India PM E-DRIVE Scheme Outlay₹10,900 crore (Oct 1, 2024 - Mar 31, 2028)
India EV GST Rate5% (compared to 18-40% on ICE vehicles)
PLI Scheme Expansion for Auto Components₹5,940 crore
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