E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग से बढ़ी आम लोगों की मुश्किलें माइलेज और पानी की किल्लत पर उठे गंभीर सवाल

Lakhan Sharma26 June 20262 min read3 viewsCars
E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग से बढ़ी आम लोगों की मुश्किलें माइलेज और पानी की किल्लत पर उठे गंभीर सवाल

भारत में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की योजना यानी E20 फ्यूल अब सवालों के घेरे में है। सरकार का यह कदम विदेशी मुद्रा बचाने के लिए तो अच्छा माना गया, लेकिन आम गाड़ी मालिकों के लिए यह काफी महंगा और सिरदर्द साबित हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से उनकी माइलेज कम हो रही है। इतना ही नहीं, इथेनॉल की कम एनर्जी डेंसिटी के चलते इंजन में घिसावट और फ्यूल पंप खराब होने जैसी धांसू समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

सरकार का कहना है कि इससे कच्चा तेल आयात कम होगा और लाखों करोड़ की बचत होगी, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका सीधा फायदा बड़ी शुगर मिलों और तेल कंपनियों को ही मिल रहा है। आम आदमी को तो बस गाड़ी के खराब होने और जेब पर पड़ते बोझ का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल पर्यावरण और खेती से जुड़ा है। एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए करीब 10,790 लीटर पानी की जरूरत होती है। नीति आयोग ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर यही हालत रही तो 2030 तक देश के 21 बड़े शहरों में पानी का संकट गहरा सकता है।

खाने-पीने की चीजों पर भी इसका असर दिख रहा है। चावल और मक्का का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में होने से दालों और तिलहन जैसी जरूरी फसलों की पैदावार कम हो रही है, जिससे भविष्य में खाने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा बना हुआ है। बिहार जैसे राज्यों में तो इथेनॉल प्लांट बंद होने से कई लोगों की नौकरियां तक चली गई हैं। इन सब परेशानियों के बीच अब लोग CNG की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। CNG को E20 के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित, माइलेज में स्थिर और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक माना जा रहा है।

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विषय (Topic) मुख्य प्रभाव (Key Impact)
माइलेज (Mileage) कम ऊर्जा के कारण माइलेज में गिरावट
इंजन (Engine) पुराने इंजनों में टूट-फूट और फ्यूल पंप को खतरा
पानी (Water Usage) 1 लीटर इथेनॉल के लिए 10,790 लीटर पानी की खपत
खाद्य सुरक्षा (Food Security) अनाज के डायवर्जन से दाल और तेल की कीमतों पर असर
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