IIT (BHU) और Michigan University का बड़ा धमाका: अब EVs की दुनिया में मचेगा तहलका!

इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के शौकीनों और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के प्रतिष्ठित संस्थान IIT (BHU) वाराणसी ने अब वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाने की तैयारी कर ली है। इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, IIT (BHU) ने अमेरिका की मशहूर University of Michigan के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है।
EV रिसर्च के क्षेत्र में नया युग: क्या होगा खास?
यह समझौता केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य को बदलने वाला एक बड़ा मिशन है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सस्टेनेबल मोबिलिटी के क्षेत्र में नए शोध (Research) और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
इस ऐतिहासिक समझौते पर 8 सितंबर, 2026 को यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के 'इलेक्ट्रिक व्हीकल सेंटर' (EVC) में हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान IIT (BHU) के डायरेक्टर प्रोफेसर अमित पात्रा और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के एसोसिएट डीन प्रोफेसर टॉड एलन मौजूद रहे।
इन बड़े लक्ष्यों पर होगा काम
इस वैश्विक गठबंधन से ऑटोमोबाइल सेक्टर में कई क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस सहयोग के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- संयुक्त नवाचार: दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता मिलकर ई-मोबिलिटी में नए आविष्कार करेगी।
- एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च: एक विशेष 'मटेरियल्स रिसर्च टीम' बनाई जाएगी जो भविष्य की गाड़ियों के लिए उन्नत सामग्री पर काम करेगी।
- ग्लोबल इम्पैक्ट: इस पार्टनरशिप का लक्ष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के वैश्विक इकोसिस्टम पर गहरा प्रभाव डालना है।
- अकादमिक जुड़ाव: छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स के लिए रिसर्च और सीखने के नए रास्ते खुलेंगे।
मजबूत होगी भारत की ई-मोबिलिटी शक्ति
IIT (BHU) के डायरेक्टर प्रोफेसर अमित पात्रा ने इस मौके पर कहा कि यह सहयोग दोनों संस्थानों की ताकतों को एक साथ लाएगा। जहाँ IIT (BHU) के पास ई-मोबिलिटी रिसर्च का गहरा अनुभव है, वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के पास इलेक्ट्रिक व्हीकल सिस्टम्स की बेजोड़ क्षमता है।
इस दौरान प्रोफेसर राजीव कुमार सिंह ने वर्तमान में चल रहे दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के बारे में भी जानकारी दी, जो इस साझेदारी के तहत स्वीकृत किए गए हैं। यह कदम न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अधिक सुलभ और उन्नत बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।