भारत में गाड़ियों की बिक्री ने तोड़े सारे रिकॉर्ड और ईवी स्कूटर की मांग हुई दोगुनी

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी सियाम ने 15 सितंबर 2026 को एक रिपोर्ट जारी की है जिसके मुताबिक इस बार अगस्त का महीना पैसेंजर गाड़ियों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन महीना रहा है। बिक्री में यह जबरदस्त उछाल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ लोगों के बढ़ते रुझान की वजह से आया है, जहां पिछले साल के मुकाबले इलेक्ट्रिक स्कूटर के प्रोडक्शन और बिक्री में दोगुने से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है।
अलग-अलग सेगमेंट में बिक्री के आंकड़े
सियाम के डेटा के मुताबिक घरेलू बाजार में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री पिछले साल के मुकाबले 36.5 प्रतिशत बढ़कर 4,39,309 यूनिट पहुंच गई, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,21,901 यूनिट था। इसके अलावा दोपहिया वाहनों की बिक्री 10.5 प्रतिशत बढ़कर 20,34,698 यूनिट हो गई जो पिछले साल 18,41,954 यूनिट थी। वहीं तिपहिया वाहनों की बिक्री भी 76,324 यूनिट से 22.8 प्रतिशत बढ़कर 93,764 यूनिट पर पहुंच गई। दोपहिया सेगमेंट में सबसे ज्यादा बढ़त स्कूटरों की रही जिनकी बिक्री 23.8 प्रतिशत बढ़कर 8,55,715 यूनिट दर्ज की गई, जबकि मोटरसाइकिल की बिक्री में केवल 2.4 प्रतिशत की मामूली तेजी आई और यह 11,33,047 यूनिट रही। वहीं मोपेड की बिक्री 4.7 प्रतिशत बढ़कर 45,936 यूनिट पर पहुंच गई।
इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में तूफानी तेजी
250 वॉट से ज्यादा क्षमता वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों का प्रोडक्शन अगस्त 2025 के 83,280 यूनिट से बढ़कर अगस्त 2026 में 188,499 यूनिट हो गया है। सियाम की रिपोर्ट के अनुसार इस कैटेगरी की घरेलू बिक्री 81,017 यूनिट से छलांग लगाकर 185,303 यूनिट पर पहुंच गई है। वाहन रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त महीने में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरी बिक्री 1,82,936 से 1,84,201 यूनिट के बीच रही। जुलाई 2026 के मुकाबले इसमें 11 प्रतिशत की मासिक गिरावट जरूर आई है, लेकिन सालाना आधार पर यह अभी भी 67 से 68 प्रतिशत की बढ़त बनाए हुए है।
बाजार में इन कंपनियों का जलवा
वॉल्यूम के मामले में टीवीएस मोटर, बजाज ऑटो और एथर कंपनी बाजार में सबसे आगे चल रही हैं। अगस्त महीने के वाहन रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक टीवीएस 49,155 यूनिट के साथ पहले नंबर पर है, इसके बाद 41,262 यूनिट के साथ बजाज दूसरे और 28,952 यूनिट के साथ एथर तीसरे स्थान पर है। हालांकि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 36.5 प्रतिशत की भारी तेजी आई है, लेकिन सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन का कहना है कि पिछले साल अगस्त 2025 का बेस कमजोर होने की वजह से यह सालाना तुलना ज्यादा लग रही है। उस दौरान ग्राहकों ने 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली सरकार की जीएसटी कटौती के इंतजार में गाड़ियों की खरीद टाल दी थी, जिससे पिछले साल बिक्री कम थी।
प्रमुख इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की जानकारी
| Model Name (मॉडल का नाम) | Battery Capacity (बैटरी क्षमता) | Claimed Range (आईडीसी रेंज) | Real-world Range (वास्तविक रेंज) |
|---|---|---|---|
| TVS iQube (टीवीएस आईक्यूब) | 2.3 kWh to 5.3 kWh | Up to 212 km (ST Variant) | लगभग 25-35% कम |
| Bajaj Chetak (बजाज चेतक) | 3.5 kWh | 151-153 km | लगभग 25-35% कम |
| Ather 450 Series (एथर 450 सीरीज) | S, X, and Apex models | परफॉर्मेंस आधारित | लगभग 25-35% कम |
बिक्री को बढ़ावा देने वाले कारण और विशेषज्ञ की सलाह
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्राहकों को कंपनियों द्वारा बताई जाने वाली आईडीसी रेंज पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि गर्मी और वजन जैसी असली सड़क की परिस्थितियों में यह रेंज 25 से 35 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और बिजली के खर्च में बढ़ता अंतर ही इलेक्ट्रिक स्कूटरों की इस आंधी का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि टीवीएस जुपिटर या होंडा एक्टिवा जैसे 110-125 सीसी के पेट्रोल स्कूटर अभी भी लोगों के बीच काफी पसंद किए जा रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटरों में चलने का खर्च बहुत कम होने की वजह से नए खरीदार लगातार इनकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं और नीतियां
आने वाले समय में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सितंबर से नवंबर 2026 के बीच आने वाले त्योहारी सीजन पर नजर बनाए हुए है ताकि यह देखा जा सके कि यह रफ्तार आगे भी कायम रहती है या नहीं। भविष्य में गाड़ियों की मांग राज्यों की तरफ से मिलने वाली ईवी सब्सिडी और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले संभावित प्रतिबंधों पर भी निर्भर करेगी। सियाम की रिपोर्ट और बिजनेस स्टैंडर्ड, द हिंदू, मनीकंट्रोल, ईटी ऑटो, सीएनबीसी-टीवी18, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस तथा ऑटाकार इंडिया जैसे मीडिया संस्थानों के माध्यम से यह सामने आया है कि शुरुआती बिक्री के आंकड़ों से ज्यादा ये सरकारी नीतियां बाजार की दिशा तय करेंगी।