भारत और यूरोपीय संघ की नई ट्रेड डील से सस्ती होंगी विदेशी गाड़ियां और बढ़ेंगे ऑटो एक्सपोर्ट

Lakhan Sharma13 September 20264 min read6 viewsnews
भारत और यूरोपीय संघ की नई ट्रेड डील से सस्ती होंगी विदेशी गाड़ियां और बढ़ेंगे ऑटो एक्सपोर्ट

भारत और यूरोपीय संघ यानी ईयू के बीच फ्री ट्रेड समझौते का ड्राफ्ट तैयार हो गया है जिसमें पैसेंजर गाड़ियों के लिए टैरिफ रेट कोटा तय किए गए हैं। इस फ्रेमवर्क का मुख्य मकसद भारत से 2.5 लाख कारों के एक्सपोर्ट को आसान बनाना है और साथ ही यूरोपीय देशों से 1 लाख गाड़ियां भारत में इंपोर्ट करने की अनुमति देना है। इस संधि के लिए बातचीत 27 जनवरी 2026 को पूरी हो गई थी और कानूनी समीक्षा के बाद ड्राफ्ट टैरिफ शेड्यूल जारी कर दिए गए हैं। ये शर्तें तब तक बदलाव के दायरे में रहेंगी जब तक दोनों पक्ष अपनी अंदरूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर लेते। 13 सितंबर 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑटो एनेक्स की डिटेल्स अब सार्वजनिक कर दी गई हैं हालांकि इस साल के अंत तक इसके औपचारिक रूप से साइन होने की उम्मीद है और यह साल 2027 में लागू हो सकता है।

टैरिफ रेट कोटा के नियम और शर्तें

भारत की वे पैसेंजर गाड़ियां जिनमें इंटरनल कंबशन इंजन या हाइब्रिड सिस्टम है और जिनकी कीमत कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट आधार पर 50,000 यूरो तक है, वे एक्सपोर्ट कोटे के लिए योग्य हैं। पहले साल में 25,000 गाड़ियां 8 प्रतिशत की ड्यूटी दर पर भेजी जा सकेंगी जो पांचवें साल तक धीरे-धीरे घटकर शून्य हो जाएगी। इस कोटे से ज्यादा गाड़ियां भेजने पर स्टैंडर्ड एमएफएन ड्यूटी लागू होगी। दूसरी तरफ यूरोपीय निर्माताओं के लिए भारत आने वाली गाड़ियों के नियम अलग हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में यूरोपीय संघ से 17,191 कारें इंपोर्ट की गई थीं, जिससे पहले साल के लिए 1,00000 गाड़ियों का नया कोटा वॉल्यूम के हिसाब से काफी बड़ा उछाल है। इसमें 15,000 यूरो यानी मौजूदा दरों के हिसाब से करीब 16.6 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारें शामिल नहीं होंगी।

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इंपोर्ट ड्यूटी और कीमत के स्लैब

यूरोपीय इंपोर्ट के लिए ड्यूटी का ढांचा कीमत के हिसाब से अलग-अलग है। 16.6 लाख रुपये से 38.8 लाख रुपये के बीच आने वाले मॉडलों पर पहले साल ड्यूटी 110 प्रतिशत से घटकर 35 प्रतिशत हो जाएगी और पांचवें साल तक यह गिरकर 10 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। 38.8 लाख रुपये से ज्यादा महंगी गाड़ियों पर ड्यूटी 30 प्रतिशत से शुरू होगी और वह भी इसी समय सीमा में घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगी। इसके अलावा पूरी तरह से नॉक डाउन यानी सीकेडी किट के लिए सालाना 75,000 यूनिट्स का अलग कोटा तय किया गया है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मामले में फिलहाल मौजूदा ड्राफ्ट के तहत पाबंदियां हैं। समझौते के शुरुआती चार सालों के दौरान यूरोपीय इलेक्ट्रिक मॉडलों के लिए कोई रियायती कोटा नहीं है। 20,000 यूरो या उससे अधिक कीमत वाली गाड़ियों के लिए पांचवें साल से एंट्री मिलेगी। यही इंतजार का समय यूरोप जाने वाली भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भी लागू होता है जिन पर शुरुआती 27,500 यूनिट्स का कोटा खुलने से पहले चार साल की देरी का सामना करना पड़ेगा।

कार बाजार और कंपनियों पर असर

संभावित ग्राहकों को तुरंत कीमत में किसी बड़ी गिरावट का इंतजार करने से बचना चाहिए क्योंकि यह डील फिलहाल साइन नहीं हुई है और यह रिटेल डिस्काउंट की बजाय एक फ्रेमवर्क है। मर्सिडीज बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कंपनियों की लग्जरी गाड़ियां पहले से ही भारतीय बाजार में मौजूद हैं और उनकी कीमतें इस बात पर निर्भर करेंगी कि वे पूरी तरह से बनी हुई यूनिट के रूप में आ रही हैं या फिर यहीं असेंबल हो रही हैं। मर्सिडीज बेंज सी क्लास, बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज और ऑडी ए4 जैसी लग्जरी सिडान उस कीमत के दायरे में आती हैं जो अक्सर ड्राफ्ट में बताए गए 15,000 यूरो के मार्क से ज्यादा होती है। मारुति सुजुकी इस एक्सपोर्ट विंडो का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में दिखती है क्योंकि उसने वित्त वर्ष 2026 में 447,000 से ज्यादा पैसेंजर गाड़ियों का एक्सपोर्ट किया था।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने 13 सितंबर 2026 को बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान भारत के कुल इलेक्ट्रिक वाहन एक्सपोर्ट में अकेले मारुति की हिस्सेदारी 97 प्रतिशत थी। जहां ये कंपनियां ग्लोबल बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, वहीं यूरोपीय ब्रांड्स हाई इंपोर्ट ड्यूटी से बचने के लिए लोकल मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देते रहेंगे। यह समझौता नई दिल्ली के लिए एक रणनीतिक कदम है जो मास मार्केट बनाने वाली कंपनियों की सुरक्षा और यूरोपीय ऑटो सेक्टर में अपनी पैठ बढ़ाने के लक्ष्य के बीच संतुलन बनाता है। टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे उद्योग के दिग्गजों को होमोलॉगेशन के नए विकल्प मिलते हैं, हालांकि उन्हें यूरोपीय बाजारों में प्रवेश करने के लिए लागत और सर्विस की जरूरतों को संभालना होगा। खरीदारों और जानकारों को केंद्रीय मंत्रिमंडल और यूरोपीय परिषद की घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि ये नियम कब से पूरी तरह कानूनी रूप से लागू होंगे।


Price, Mileage and Specs Overview Table:

Feature / Parameter (English Index)Details / Quota Limits
Indian ICE/Hybrid Car Export Quota (Year 1)250,000 vehicles (Price up to €50,000, 8% duty reducing to 0% by Year 5)
European Car Import Quota to India (Year 1)100,000 vehicles (Excludes cars below €15,000 / ~16.6 lakh rupees)
EU Import Duty (₹16.6 Lakh to ₹38.8 Lakh)Reduced from 110% to 35% in Year 1, reaching 10% by Year 5
EU Import Duty (Above ₹38.8 Lakh)Starts at 30%, scaling down to 10% by Year 5
Completely Knocked Down (CKD) Kits Quota75,000 units annually
Electric Vehicles (EV) AccessRestricted for first 4 years; opens in Year 5 for EVs priced €20,000+
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