लोहम ने जिम्बाब्वे से भेजी पहली लिथियम ओर की खेप बना भारत के लिए गाजप रिकॉर्ड

Lakhan Sharma10 September 20263 min read6 viewsEV News
लोहम ने जिम्बाब्वे से भेजी पहली लिथियम ओर की खेप बना भारत के लिए गाजप रिकॉर्ड

भारतीय ईवी और बैटरी सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। लोहम (LOHUM) कंपनी ने जिम्बाब्वे की माटाबेलेलैंड साउथ प्रोविंस में स्थित अपनी खदानों से लिथियम ओर की पहली खेप सफलतापूर्वक रवाना कर दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी भारतीय कंपनी ने विदेश में स्थित अपनी खदानों से लिथियम का उत्पादन करके दिखाया है।

खदानों का दायरा और अनुमानित भंडार

कंपनी के पास जिम्बाब्वे में लगभग 1,100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली दस स्पोड्यूमीन-असर खदानों के अधिकार हैं। लोहम का ऐसा अनुमान है कि इन ब्लॉकों में करीब 3 करोड़ से 4 करोड़ टन अयस्क मौजूद है, जिसमें 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक लिथियम ऑक्साइड की मात्रा है। एनर्जी वॉच की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये संपत्तियां अपने ऑपरेशनल जीवनकाल के दौरान लगभग 300,000 टन लिथियम कार्बोनेट के बराबर समर्थन दे सकती हैं।

इसके अलावा, लोहम ने यह भी बताया है कि उसके पास पास के 90 और ब्लॉकों को हासिल करने का विकल्प भी मौजूद है। आउटलुक बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इसका इन-सीटू मूल्य 7 अरब डॉलर आंका है, हालांकि यह मौजूदा बाजार कीमतों पर जमीन के अंदर मौजूद सामग्री का एक सकल अनुमान है, न कि कोई वास्तविक मुनाफा या प्रोजेक्ट का वैल्यूएशन।

विवरण (Index)जानकारी (Details)
Company (कंपनी)LOHUM (लोहम)
Location (लोकेशन)Matabeleland South Province, Zimbabwe
Ore Reserves (भंडार अनुमान)30 Million to 40 Million Tonnes
Lithium Grade (ग्रेड)1% to 3% Lithium Oxide
Estimated Life Output (कुल क्षमता)300,000 Tonnes Lithium Carbonate Equivalent
Mission Support (सरकारी योजना)National Critical Mineral Mission (₹16,300 Crore)
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भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा 17 मार्च 2026 को दिए गए एक संसदीय जवाब में यह बात साफ हो चुकी है कि भारत अपनी लिथियम की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। खान मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 में मंजूर की गई नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन योजना के तहत सरकार कंपनियों को विदेश में ऐसे खनिज संसाधन सुरक्षित करने के लिए 16,300 करोड़ रुपये का खर्च दे रही है ताकि देश को बढ़ावा मिल सके।

लोहम का मुख्य इरादा चार अलग-अलग चरणों को आपस में जोड़ना है, जिसमें माइनिंग, प्रोसेसिंग, बैटरी-मटेरियल मैन्युफैक्चरिंग और एंड-ऑफ-लाइफ रीसाइक्लिंग शामिल हैं। आउटलुक बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत वर्मा ने कहा है कि कंपनी का मकसद केवल कच्चे अयस्क को बाहर भेजना नहीं है, बल्कि जिम्बाब्वे में ही स्थानीय स्तर पर वैल्यू तैयार करना है।

ऑपरेशनल चुनौतियां और आगे के कदम

सिर्फ किसी खदान का मालिक बन जाने से पूरी सप्लाई चेन पर नियंत्रण नहीं मिल जाता है। बैटरी तक पहुंचने से पहले स्पोड्यूमीन ओर को कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है, जिसमें क्रश करना, कंसंट्रेशन, केमिकल कन्वर्जन और ग्राहक की योग्यता शामिल हैं। इन सभी चरणों में रिकवरी लॉस और पैसों की जरूरत से जुड़े जोखिम हमेशा बने रहते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह साफ बताया गया है कि प्रोजेक्ट को कमर्शियल रूप से सफल बनाने के लिए कुछ बड़े मील के पत्थर पार करना अभी भी बहुत जरूरी है।

इनमें एक मान्यता प्राप्त कोड के तहत स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट किए गए मिनरल-रिसोर्स अनुमानों का सत्यापन होना शामिल है। इसके अलावा सटीक शिपमेंट टन भार और प्राप्त ग्रेड का खुलासा करना होगा, कंसंट्रेशन फैसिलिटी और भारत में रिफाइनरी को शुरू करना होगा, और सेल या बैटरी निर्माताओं के साथ लंबी अवधि के ऑफटेक अनुबंधों को पूरा करना होगा। ये सभी बातें इस बात का पक्का सबूत देने के लिए जरूरी हैं कि प्रोजेक्ट सिर्फ शुरुआती घोषणाओं से आगे बढ़ चुका है।

भविष्य की योजनाएं और अगला चरण

एनर्जी वॉच की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडस्ट्री की रिपोर्ट में हर साल लगभग 30,000 टन के एकीकृत उत्पादन रेट की योजना बनाई गई है। हालांकि, प्रस्तावित भारतीय रिफाइनरी के लिए सटीक जगह, लागत और इसे शुरू करने की तारीख की अभी तक सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है। जब तक ये सभी ऑपरेशनल हिस्से पूरी तरह से अपनी जगह पर सेट नहीं हो जाते, तब तक यह पहली खेप भारतीय निर्माताओं के लिए एक पूरी तरह से काम करने वाली सप्लाई चेन की जगह एक बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण शुरुआत ही मानी जाएगी।

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