UK se aayi 642 gadiyan sasti import manzoori mili

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए नए व्यापार समझौते के तहत अब ब्रिटिश कारों के आयात को हरी झंडी मिल गई है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने साल 2026 के बचे हुए समय के लिए ब्रिटेन से 642 गाड़ियां भारत लाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल सात कंपनियों के आवेदनों को स्वीकार किया गया है, जबकि एक कंपनी जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर पाई थी। सरकार के इस कदम से देश में ब्रिटिश लग्जरी कारों का रास्ता साफ हो गया है।
ट्रेड डील और कम कस्टम ड्यूटी का नियम
भारत और यूके के इस नए व्यापार समझौते के तहत सभी ब्रिटिश गाड़ियों पर सीधे टैक्स छूट नहीं मिलती है। इसके लिए एक तय कोटा बनाया गया है जिसके तहत सीमित संख्या में आने वाली गाड़ियों पर ही कम कस्टम ड्यूटी चुकानी पड़ती है। तय सीमा से ज्यादा गाड़ियां मंगाने पर पुराना और ज्यादा आयात शुल्क ही देना होगा। अलग-अलग इंजन क्षमता के हिसाब से इन गाड़ियों के नियम और ड्यूटी तय की गई है। पेट्रोल इंजन जो 3000 सीसी से बड़े हैं और डीजल इंजन जो 2500 सीसी से बड़े हैं, उनके लिए सालाना 10000 गाड़ियों का कोटा है। इस कोटे में कस्टम ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर सीधे 30 फीसदी रह जाती है। वहीं 1500 सीसी तक की छोटी गाड़ियों के लिए अलग से कोटा तय किया गया है जहां ड्यूटी 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो जाती है। साल 2026 के लिए कुल कोटा 10480 गाड़ियों का है जिसे साल के बीच में डील शुरू होने की वजह से आनुपातिक रूप से लागू किया गया है।
किन कंपनियों को मिला फायदा और कौन सी गाड़ियां शामिल
इस योजना का लाभ केवल अधिकृत कंपनियों और ओरिजिनल उपकरण निर्माताओं को ही मिलेगा। इसमें कोई भी स्वतंत्र या ग्रे-मार्केट आयातक हिस्सा नहीं ले सकता है। इस दायरे में बेंटले, रोल्स-रॉयस, मैकलेरन, लोटस, एस्टन मार्टिन, मिनी और जगुआर लैंड रोवर के चुनिंदा मॉडल आते हैं। इस साल मई में जगुआर लैंड रोवर इंडिया ने दो यूके-आयातित मॉडल की कीमतों में कमी भी की थी। रेंज रोवर एसवी की कीमत 4.25 करोड़ रुपये से घटाकर 3.50 करोड़ रुपये कर दी गई थी, जबकि रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटकर 2.35 करोड़ रुपये हो गई थी। हालांकि यह बदलाव भारत में असेंबल होने वाले या स्लोवाकिया में बने डिफेंडर और डिस्कवरी मॉडल पर लागू नहीं होता है।
खरीदारों के लिए क्या है स्थिति और आगे की योजना
देशभर में केवल 642 गाड़ियां ही पास होने के कारण ग्राहकों को गाड़ियों की तुरंत डिलीवरी मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। शुरुआती दौर में मांग थोड़ी कम रही है जिसके पीछे कम समय, ज्यादा पूंजी की जरूरत और कई कंपनियों का भारत में ही गाड़ियों की असेंबली करना मुख्य वजह है। सीमा शुल्क क्लियरेंस के वक्त आयातकों को यूके के अधिकारियों द्वारा जारी किया गया मूल प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। सरकार 31 दिसंबर से पहले दूसरे दौर के आवेदन को लेकर और जानकारी दे सकती है।
| Model / Category (इंग्लिश इंडेक्स) | Original Price (पुरानी कीमत) | Revised Price (नई कीमत) |
|---|---|---|
| Range Rover SV (UK Import) | Rs 4.25 Crore | Rs 3.50 Crore |
| Range Rover Sport SV (UK Import) | Rs 2.75 Crore | Rs 2.35 Crore |