अल्ट्रावायलेट का गजब फैसला टेसेरक्ट स्कूटर के लिए 779 करोड़ रुपये में बनेगी नई धांसू फैक्ट्री

अल्ट्रावायलेट ऑटोमोटिव ने तमिलनाडु के शूलगिरि में सिडको इंडस्ट्रियल पार्क के पास एक नया इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाने का बड़ा ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी कुल 779 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। कंपनी ने इस नए प्लांट का नाम 'बिगगा' रखा है और इसे साल 2027 तक बाजार में आने वाले टेसेरक्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। रॉयटर, सीएनबीसी-टीवी18, बिजनेस स्टैंडर्ड और द टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना की पुष्टि 10 सितंबर 2026 को की गई थी। इस फैक्ट्री का निर्माण अगले पांच सालों में पूरा होगा और शुरुआती समय में यहां हर साल ढाई लाख गाड़ियां बनाई जाएंगी। इसके बाद साल 2029 तक इस क्षमता को बढ़ाकर सालाना पांच लाख यूनिट तक ले जाया जाएगा।
नौजवानों के लिए रोजगार और मजबूत फंडिंग
इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में करीब 2,000 से 3,000 डायरेक्ट नौकरियां मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा हर डायरेक्ट नौकरी के मुकाबले पांच से सात इनडायरेक्ट नौकरियां भी पैदा होंगी। कंपनी के सीटीओ और को-फाउंडर नीरज राजमोहन ने बताया है कि इस पूरे फंड का इंतजाम कंपनी अपने आंतरिक रिजर्व, इक्विटी और भविष्य के कैश फ्लो से करेगी ताकि कर्ज कम से कम रहे। इस प्रोजेक्ट में क्वालकॉम और टीवीएस मोटर जैसे बड़े नाम भी निवेशक के रूप में जुड़े हुए हैं।
रणनीतिक फायदे और कर्नाटक प्लांट का अपग्रेड
कंपनी के सीईओ नारायण सुब्रमण्यम ने बताया कि होसुर की यह जगह उनके बेंगलुरु वाले रिसर्च सेंटर से सिर्फ डेढ़ घंटे की दूरी पर है। इससे लॉजिस्टिक्स का काम बहुत आसान हो जाएगा क्योंकि दूसरी जगहों से आने में चार घंटे तक लग सकते हैं। इसके अलावा कंपनी ने कर्नाटक के जिगानी में मौजूद अपने पुराने प्लांट को अपग्रेड करने के लिए 200 करोड़ रुपये अलग रखे हैं। इससे उस प्लांट की क्षमता सालाना 30 हजार यूनिट से बढ़कर करीब 60 हजार यूनिट हो जाएगी। दक्षिण भारत में कंपनी का कुल मैन्युफैक्चरिंग निवेश लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
टेसेरक्ट स्कूटर की लॉन्चिंग और बुकिंग की जानकारी
कंपनी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया है कि टेसेरक्ट स्कूटर को साल 2027 की पहली तिमाही में बाजार में उतारा जाएगा। शुरुआत में इसका प्रोडक्शन कर्नाटक वाले प्लांट में ही किया जाएगा और जब होसुर का नया प्लांट पूरी तरह तैयार हो जाएगा तब सारा काम वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। कंपनी का टारगेट है कि भविष्य में 50 प्रतिशत स्कूटर और 50 प्रतिशत मोटरसाइकिलें बनाई जाएं और शुरुआत में हर महीने 10,000 स्कूटर तैयार किए जाएं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अल्ट्रावायलेट के पास टेसेरक्ट के लिए 70,000 से ज्यादा पेड बुकिंग आ चुकी हैं। पहले बुकिंग राशि 1,000 रुपये थी जिसे बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है और कंपनी के मुताबिक बुकिंग रद्द कराने वाले ग्राहक 2 प्रतिशत से भी कम हैं।
कीमत और परफॉर्मेंस स्पेसिफिकेशन
इस स्कूटर को सबसे पहले 5 मार्च 2025 को दुनिया के सामने लाया गया था। ऑटोकार इंडिया, इंडिया टुडे और बाइकवाले की रिपोर्ट्स के मुताबिक 3.5 kWh बेस मॉडल के शुरुआती 10,000 ग्राहकों के लिए एक्स-शोरूम कीमत 1,20,000 रुपये रखी गई थी। इसके बाद आने वाले यूनिट्स की लिस्ट प्राइस 1,45,000 रुपये एक्स-शोरूम होगी। इसके अलावा 5 kWh और 6 kWh वाले बड़े बैटरी पैक वेरिएंट्स की अनुमानित कीमतें क्रमशः 1.70 लाख रुपये और 2 लाख रुपये बताई जा रही हैं। हालांकि कंपनी के आधिकारिक स्टोर पेज पर अभी इनकी पुष्टि होना बाकी है इसलिए 2027 के ऑफिशियल प्राइस कार्ड का इंतजार करना बेहतर होगा। ऑन-रोड कीमत में इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन और चार्जर का खर्च शामिल होगा जो शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
| English Index / Feature | Details / Specifications |
|---|---|
| Price (Base Model) | Rs 1,20,000 (Introductory for first 10,000 units) / Rs 1,45,000 (Subsequent units) |
| Estimated Price (Higher Variants) | Rs 1.70 Lakh (5 kWh) to Rs 2 Lakh (6 kWh) approx |
| Motor Output | 14.9 kW to 15 kW peak power |
| Acceleration (0-60 km/h) | 2.9 seconds |
| Top Speed | 125 km/h |
| Battery Options & IDC Range | 3.5 kWh (162 km), 5 kWh (220 km), 6 kWh (261 km) |
| Wheels & Storage | 14-inch wheels, 34 liters underseat storage |
खरीदारों के लिए जरूरी बातें और विकल्प
ग्राहकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पहले इस स्कूटर की डिलीवरी की शुरुआती तारीख साल 2026 की पहली तिमाही थी जिसे बढ़ाकर अब साल 2027 की पहली तिमाही कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि कंपनी ने इसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम को अपग्रेड करके 100-वोल्ट आर्किटेक्चर पर सेट किया है। जो ग्राहक 2027 तक इंतजार करने को तैयार हैं, वही इसकी बुकिंग करें। अगर किसी को तुरंत गाड़ी चाहिए तो बाजार में एथर रिजटा, ओला एस1 रेंज, टीवीएस आईक्यूब और रिवर इंडी जैसे दूसरे विकल्प भी आसानी से मिल जाते हैं। अल्ट्रावायलेट अपनी कुल गाड़ियों का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा विदेशों में भी बेचती है जिसे आने वाले पांच सालों में बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। अब कंपनी अगले छह से आठ महीनों तक शूलगिरि में जमीन के विकास का काम करेगी और वित्तीय वर्ष 2028 की दूसरी तिमाही से यहां बड़े पैमाने पर गाड़ियां बनना शुरू हो जाएंगी।