Volkswagen India में छंटनी की तैयारी क्या 12 फीसदी कर्मचारियों की नौकरी पर लटक रही है तलवार

जर्मन ऑटोमोबाइल दिग्गज फॉक्सवैगन ग्रुप को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने खर्चों को कम करने के लिए भारत में अपने कुल वर्कफोर्स में से करीब 12 फीसदी कर्मचारियों की संख्या घटा सकती है। यह कटौती अगले तीन सालों यानी 2027 तक पूरी की जा सकती है। इस बदलाव से कंपनी के व्हाइट-कॉलर और शॉप-फ्लोर, दोनों तरह के कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।
कंपनी का क्या है कहनाफॉक्सवैगन और स्कोडा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पीयूष अरोड़ा ने इस मामले पर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि वे इस तरह की अटकलों वाली खबरों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल किसी भी तरह की छंटनी का कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया गया है और न ही किसी विशेष साइट या विभाग के बारे में जानकारी दी गई है। इसलिए, कर्मचारियों को किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।
भारतीय बाजार में चुनौतियां और विस्तारभारत के ऑटो बाजार में फॉक्सवैगन का मुकाबला मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों से है। कंपनी पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में अपने प्लांट्स के जरिए हर साल करीब 3.15 लाख गाड़ियां बनाने की क्षमता रखती है। इसके बावजूद, कंपनी अपनी इंजीनियरिंग क्षमताओं को लगातार बढ़ा रही है। अप्रैल 2026 में पुणे में कंपनी ने अपने टेक्नोलॉजी सेंटर का विस्तार किया है, जहां सॉफ्टवेयर और सस्टेनेबल मोबिलिटी पर काम करने के लिए नई भर्तियां भी की गई हैं।
भविष्य की रणनीति और निवेशऑटोमोबाइल कंपनियां अक्सर नई तकनीक, सॉफ्टवेयर और बेहतर डीलरशिप के लिए भारी निवेश करती हैं। खर्चों को मैनेज करने के लिए कंपनी अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही है। जानकारों का मानना है कि कंपनी के सप्लायर्स और डीलर्स को अभी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कंपनी का पूरा ध्यान फिलहाल अपनी प्रोडक्शन और सर्विस क्वालिटी को बेहतर बनाए रखने पर है। नौकरी ढूंढ रहे लोगों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल फॉक्सवैगन की आधिकारिक वेबसाइट पर ही करियर संबंधी जानकारी देखें।